IPL रिटायरमेंट के बाद कमेंट्री को लेकर एमएस धोनी ने तोड़ी चुप्पी, बताया अपना फ्यूचर प्लान
महेंद्र सिंह धोनी ने आईपीएल रिटायरमेंट के बाद कमेंट्री को लेकर अपनी राय रखी और बताया कि आंकड़ों, आलोचना की बारीक रेखा और जिम्मेदारी भरे इस रोल को वह अपने भविष्य का हिस्सा नहीं मानते।
MS Dhoni on his retirement plans: भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार मैदान पर नहीं, बल्कि अपने भविष्य को लेकर दिए बयान की वजह से। अपने शांत स्वभाव और कम बोलने की आदत के लिए मशहूर धोनी ने आईपीएल से रिटायरमेंट के बाद कमेंट्री को लेकर खुलकर बात की है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद धोनी लंबे समय से सार्वजनिक क्रिकेट चर्चाओं से दूर रहे हैं। आईपीएल ही उनका आखिरी बड़ा मंच रहा है, जहां वह चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलते नजर आए। ऐसे में फैंस के मन में यह सवाल लगातार बना हुआ था कि क्या धोनी आगे चलकर टीवी कमेंट्री में कदम रखेंगे।
कमेंट्री को क्यों मानते हैं MS Dhoni मुश्किल
एक बातचीत के दौरान धोनी ने कहा कि कमेंट्री बेहद कठिन काम है। उनके मुताबिक, मैच का वर्णन करने और खिलाड़ियों की आलोचना करने के बीच बहुत बारीक अंतर होता है। कई बार बोलते हुए यह एहसास भी नहीं होता कि बात कब गलत दिशा में चली गई।
धोनी (MS Dhoni) ने साफ किया कि वह हमेशा उस पक्ष में रहना पसंद करेंगे, जहां खेल को समझाया जाए, न कि किसी खिलाड़ी को निशाना बनाया जाए। अगर टीम हारती है तो उसके पीछे कारण होते हैं, लेकिन उन कारणों को इस तरह बताना एक कला है कि किसी को बुरा न लगे।
आंकड़ों से दूरी भी बड़ी वजह
धोनी (MS Dhoni) ने यह भी स्वीकार किया कि आंकड़े याद रखना उनकी ताकत नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने खुद के रिकॉर्ड भी ठीक से याद नहीं रहते, जबकि कमेंट्री में कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें हर दौर और हर खिलाड़ी के आंकड़े जुबानी याद होते हैं। उनके अनुसार, यही वजह है कि वह खुद को कमेंट्री की भूमिका के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं मानते।
आईपीएल 2025 में चेन्नई का खराब प्रदर्शन
धोनी (MS Dhoni) का आखिरी क्रिकेट मुकाबला आईपीएल 2025 में देखने को मिला, जहां उन्होंने बीच सत्र में टीम की कप्तानी संभाली। हालांकि यह सीजन चेन्नई सुपर किंग्स के लिए बेहद निराशाजनक रहा। टीम 14 मैचों में सिर्फ चार जीत दर्ज कर पाई और तालिका में सबसे नीचे रही। बल्लेबाजी में भी धोनी का प्रदर्शन खास नहीं रहा। उन्होंने 13 पारियों में 196 रन बनाए, औसत 24.50 रहा और उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 30 रन रहा।
IPL रिटायरमेंट के बाद कमेंट्री को लेकर एमएस धोनी ने तोड़ी चुप्पी, बताया अपना फ्यूचर प्लान
महेंद्र सिंह धोनी ने आईपीएल रिटायरमेंट के बाद कमेंट्री को लेकर अपनी राय रखी और बताया कि आंकड़ों, आलोचना की बारीक रेखा और जिम्मेदारी भरे इस रोल को वह अपने भविष्य का हिस्सा नहीं मानते।
MS Dhoni on his retirement plans: भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार मैदान पर नहीं, बल्कि अपने भविष्य को लेकर दिए बयान की वजह से। अपने शांत स्वभाव और कम बोलने की आदत के लिए मशहूर धोनी ने आईपीएल से रिटायरमेंट के बाद कमेंट्री को लेकर खुलकर बात की है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद धोनी लंबे समय से सार्वजनिक क्रिकेट चर्चाओं से दूर रहे हैं। आईपीएल ही उनका आखिरी बड़ा मंच रहा है, जहां वह चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलते नजर आए। ऐसे में फैंस के मन में यह सवाल लगातार बना हुआ था कि क्या धोनी आगे चलकर टीवी कमेंट्री में कदम रखेंगे।
कमेंट्री को क्यों मानते हैं MS Dhoni मुश्किल
एक बातचीत के दौरान धोनी ने कहा कि कमेंट्री बेहद कठिन काम है। उनके मुताबिक, मैच का वर्णन करने और खिलाड़ियों की आलोचना करने के बीच बहुत बारीक अंतर होता है। कई बार बोलते हुए यह एहसास भी नहीं होता कि बात कब गलत दिशा में चली गई।
धोनी (MS Dhoni) ने साफ किया कि वह हमेशा उस पक्ष में रहना पसंद करेंगे, जहां खेल को समझाया जाए, न कि किसी खिलाड़ी को निशाना बनाया जाए। अगर टीम हारती है तो उसके पीछे कारण होते हैं, लेकिन उन कारणों को इस तरह बताना एक कला है कि किसी को बुरा न लगे।
आंकड़ों से दूरी भी बड़ी वजह
धोनी (MS Dhoni) ने यह भी स्वीकार किया कि आंकड़े याद रखना उनकी ताकत नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने खुद के रिकॉर्ड भी ठीक से याद नहीं रहते, जबकि कमेंट्री में कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें हर दौर और हर खिलाड़ी के आंकड़े जुबानी याद होते हैं। उनके अनुसार, यही वजह है कि वह खुद को कमेंट्री की भूमिका के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं मानते।
आईपीएल 2025 में चेन्नई का खराब प्रदर्शन
धोनी (MS Dhoni) का आखिरी क्रिकेट मुकाबला आईपीएल 2025 में देखने को मिला, जहां उन्होंने बीच सत्र में टीम की कप्तानी संभाली। हालांकि यह सीजन चेन्नई सुपर किंग्स के लिए बेहद निराशाजनक रहा। टीम 14 मैचों में सिर्फ चार जीत दर्ज कर पाई और तालिका में सबसे नीचे रही। बल्लेबाजी में भी धोनी का प्रदर्शन खास नहीं रहा। उन्होंने 13 पारियों में 196 रन बनाए, औसत 24.50 रहा और उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 30 रन रहा।
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