35 की उम्र में ओलंपिक मेडलिस्ट साइना नेहवाल ने बैडमिंटन से संन्यास लिया। चोट और आर्थराइटिस के चलते पूर्व वर्ल्ड नंबर 1 ने अपने शानदार करियर को अलविदा कहा।
Saina Nehwal: 35 की उम्र में ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल ने बैडमिंटन को कहा अलविदा
भारतीय खेल जगत की सबसे बड़ी पहचान बन चुकी साइना नेहवाल ने आखिरकार अपने शानदार करियर पर विराम लगा दिया है। 35 वर्ष की उम्र में ओलंपिक कांस्य पदक विजेता ने बैडमिंटन से संन्यास लेने का ऐलान किया है। पिछले करीब दो साल से चोटों से जूझ रहीं साइना लंबे समय से कोर्ट से दूर थीं और अब उन्होंने साफ कर दिया है कि उनका शरीर अब एलीट लेवल के खेल की कड़ी मांगों को झेलने की हालत में नहीं है।
लंदन ओलंपिक 2012 में इतिहास रचने वाली साइना (Saina Nehwal) भारत की उस पीढ़ी का चेहरा रहीं, जिसने बैडमिंटन को देश में नई पहचान दिलाई। उनकी आक्रामक शैली, फिटनेस और कभी हार न मानने वाला जज़्बा करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा बना। लेकिन हर महान सफर की तरह, इस कहानी का भी एक ठहराव है।
पॉडकास्ट में किया संन्यास का खुलासा
एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान साइना (Saina Nehwal) ने अपने फैसले की वजहें साझा कीं। उन्होंने कहा, “मैं तो दो साल पहले ही खेलना छोड़ चुकी थी। जब आप खेल नहीं पाते, तो वहीं सब खत्म हो जाता है।” पूर्व विश्व नंबर 1 खिलाड़ी ने बताया कि उनके घुटने की हालत लगातार खराब होती गई, कार्टिलेज पूरी तरह खत्म हो चुका है और आर्थराइटिस की समस्या ने हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग नामुमकिन बना दी।

घुटने की चोट बनी सबसे बड़ी बाधा
साइना (Saina Nehwal) ने स्वीकार किया कि पहले जहां वह 8-9 घंटे की ट्रेनिंग कर पाती थीं, अब एक-दो घंटे में ही घुटना जवाब देने लगता था। ज्यादा अभ्यास के बाद सूजन और दर्द इतना बढ़ जाता कि आगे मेहनत करना मुश्किल हो जाता। 2016 रियो ओलंपिक में लगी गंभीर चोट के बाद उन्होंने दमदार वापसी जरूर की, लेकिन समस्या बार-बार लौटती रही।
संघर्ष के बीच भी कायम रहा जज्बा
2017 विश्व चैंपियनशिप में कांस्य और 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक उनके मजबूत इरादों का प्रमाण हैं। बावजूद इसके, 2024 में उन्होंने खुद माना था कि आर्थराइटिस के कारण टॉप लेवल की ट्रेनिंग अब संभव नहीं रही। आखिरकार उन्होंने अपने शरीर के संकेतों को समझते हुए विदाई का फैसला लिया।

उपलब्धियों से भरा Saina Nehwal का सुनहरा करियर
ओलंपिक कांस्य, विश्व नंबर 1 रैंक, विश्व चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक, 24 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खिताब और खेल रत्न, पद्म श्री व पद्म भूषण जैसे सम्मान साइना नेहवाल (Saina Nehwal) का नाम भारतीय खेल इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा। उनका सफर सिर्फ पदकों की कहानी नहीं, बल्कि हौसले और मेहनत की मिसाल है।
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